Saturday, 23 June 2018

इओसिनोफिलिया का आयुर्वेदिक उपचार | Eosinophilia Ayurvedic Treatment in Hindi

June 23, 2018 6 Comments
दोस्तों आज हम आप को इओसिनोफिलिया के बारे में बताएंगे की ये क्या होता क्यों होता है इसके लक्षण और कारण क्या है  और इसको ठीक कैसे करें।
Eosinophilia Ayurvedic Treatment in Hindi

इओसिनोफिलिया क्या है?

इओसिनोफिल (एसिडोफिल) श्वेत रक्त कणिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) का ही एक प्रकार है, जो अस्थिमज्जा में निर्मित होता है और रक्तप्रवाह और आँतों की परतों में पाया जाता है। ये शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र, अर्थात परजीवी, बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था, का हिस्सा होता है।

इओसिनोफिलिया एक चिकित्सीय शब्द है, जो रक्त में या शरीर के ऊतकों में इओसिनोफिल्स की असामान्य मात्रा के बनने और इकठ्ठा होने को समझाता है। 

रक्त की कुल मात्रा में 400-450 प्रति माइक्रोलीटर की इओसिनोफिल की मात्रा को अधिक माना जाता है। गंभीर प्रकार के इओसिनोफिलिया में, इओसिनोफिल्स की मात्रा 5,000 कोशिकाओं तक हो सकती है।

इओसिनोफिलिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें:
  • फेमिलियल इओसिनोफिलिया (पारिवारिक इओसिनोफिलिया)- यह इओसिनोफिल की वृद्धि को नियंत्रित करने वाले जीन में समस्या होने के कारण उत्पन्न होता है।
  • द्वितीयक इओसिनोफिलिया-यह परजीवी संक्रमण, स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया, एलर्जी, या अन्य सूजन उत्पन्न करने वाले रोगों से सम्बंधित होता है।
  • प्राथमिक इओसिनोफिलिया-कुछ विशेष प्रकार के ल्यूकीमिया या दीर्घकालीन माइलॉयड विकार जैसे मायेलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम से सम्बंधित इओसिनोफिल की उत्पत्ति में परिवर्तन।

जाँच और परीक्षण

रक्तप्रवाह में इओसिनोफिलिया का निर्धारण आसान सी इओसिनोफिल की मात्रा की जाँच, जो कि सीबीसी (कम्पलीट ब्लड काउंट) के हिस्से के रूप में की जाती है, के द्वारा किया जाता है। ऊतक सम्बन्धी इओसिनोफिलिया का निर्धारण सम्बंधित ऊतक की जाँच (स्किन बायोप्सी) द्वारा किया जाता है। आगे की अन्य जांचों में सीटी स्केन्स, एक्स-रे, लिवर की कार्यक्षमता की जाँच, सेरोलोजिकल परीक्षण, मल परीक्षण, और मूत्र परीक्षण किये जाते हैं।

डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब

Q1. इओसिनोफिलिया क्या है?

इओसिनोफिलिया एक चिकित्सीय शब्द है, जो रक्त में या शरीर के ऊतकों में एओसिनोफिल्स की असामान्य मात्रा के बनने और इकठ्ठा होने को समझाता है। इओसिनोफिल्स (दूसरा नाम ‘एसिडोफिल्स’), श्वेत रक्त कणिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) का ही एक प्रकार है जो अस्थिमज्जा में निर्मित होता है, और रक्तप्रवाह और आँतों की परतों में पाया जाता है। ये शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र, अर्थात परजीवी, बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है। रक्त की कुल मात्रा में 400-450 प्रति माइक्रोलीटर की इओसिनोफिल की मात्रा को अधिक माना जाता है। गंभीर प्रकार के इओसिनोफिलिया में, इओसिनोफिल्स की मात्रा 5,000 कोशिकाओं तक हो सकती है। 

Q2.यदि मैं इओसिनोफिलिया से पीड़ित हूँ, तो मुझे ये कब पता चलेगा?

बुखार, थकावट, खाँसी, सूजन, साँस लेने में कमी, केंद्रीय तन्त्रिका तंत्र की अक्रियता, माँसपेशियों में दर्द, खुजली, पेटदर्द, अतिसार, शरीर के बाहरी किनारों की तंत्रिकाओं के रोग और रक्त सम्बन्धी परिणाम ही इओसिनोफिलिया के लक्षण हैं.

Q3. इओसिनोफिलिया क्यों होता है?

इओसिनोफिलिया की उत्पत्ति की निश्चित कार्यप्रणाली आमतौर पर अस्पष्ट ही होती है। इओसिनोफिलिया के अधिकतर मामलों के लिए “इडियोपैथिक” शब्द प्रयुक्त होता है, जिसका अर्थ है “अज्ञात उत्पत्ति द्वारा”।
इओसिनोफिलिया किसी विशेष क्षेत्र में हुए रोग या इन कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पन्न होने के कारण हो सकता है। इओसिनोफिलिया के प्रकार के आधार पर इसकी उत्पत्ति का कारण तय होता है। कारणों में हैं:
एलर्जी के रोग, जैसे अस्थमा, एक्जिमा, और एलर्जिक रायनाइटिस।

परजीवी कीटाणुओं द्वारा रोग

Q4. इओसिनोपीनीया क्या है?

इओसिनोपीनीया तनाव के कारण होता है, जैसे तीव्र बैक्टीरियल संक्रमण, और ग्लुकोकोर्टिकोइड्स से उपचार के बाद। इओसिनोपीनीया का कोई विपरीत परिणाम ज्ञात नहीं है।

Q5. इसकी समस्याएँ क्या हैं?

सभी प्रभावित व्यक्तियों में अस्थि मज्जा संयुक्त होती है, लेकिन सबसे गंभीर समस्या में ह्रदय और केंद्रीय तन्त्रिका तंत्र भी संलग्न होता है। अंगों की कार्यप्रणाली में कठिनाई और उनके प्रकटीकरण में अत्यंत परिवर्तन रहता है। ह्रदय में होने वाला संरचनागत परिवर्तन, थ्रोम्बोसिस, एन्डोकार्डियल फाइब्रोसिस, और रेस्ट्रिक्टिव एण्डोमायोकार्डियोपेथी तक पहुँच सकता है। अन्य अंगों के ऊतकों को होने वाली क्षति भी इसके समान ही होती है।

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें और सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त विटामिन और प्रोटीन प्राप्त कर रहे होने हरे पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों की खपत को बढा के।

शहद, हल्दी, काली मिर्च, लहसुन, अदरक आपकी प्रतिरक्षा को मज़बूत करते हैं।

खोज में पाया गया है कि इस बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक खाद्य एलर्जी है। इसलिए उन खाद्य पदार्थों जिस से आपको एलर्जी होती हैं – उनसे परहेज़ करना बेहतर है।

योग और व्यायाम

रक्त में इओसिनोफिल की मात्रा को कम करने में सहायक योगासन:
  • त्रिकोणप्रणामासन
  • सूर्य नमस्कार
  • वज्रासन
  • शशांकासन
  • प्राणायाम श्वसन तंत्र की माँसपेशियों के लिए लाभकारी होते हैं।

घरेलू उपाय (उपचार)

अपने भाप के पानी में नीलगिरी की कुछ बूंदों डाले, इससे बलगम को नरम और साफ़ करने में मदद मिलेगी।
अपनी चाय में कुछ कुचले हुए अदरक या थोड़ा अदरक का रस डाले, इस समस्या का इलाज करने में कुछ हद तक मदद करेगी।

आप पानी में काली मिर्च पाउडर और शहद का मिश्रण भी ले सकते हैं। इस घोल के दो बार के सेवन से आप अपनी प्रतिरक्षा भी सुधार सकते हैं।

पर्याप्त मात्रा में पानी पियें।

2 बड़े चम्मच मेथी को पानी में उबाल के उसे ग़रारा करें।

लक्षण

इओसिनोफिलिया के लक्षणों में इसे उत्प्रेरित करने वाली स्थितियों के लक्षण ही आते हैं:

अस्थमा के कारण इओसिनोफिलिया-व्हीज़िंग (साँस में सीटी की आवाज), श्वसनहीनता, साँस लेने में कठिनाई (डिस्निया)।

परजीवी संक्रमण के कारण इओसिनोफिलिया-पेट दर्द, अतिसार, बुखार, खाँसी, निशानों का होना।

औषधीय विपरीत प्रतिक्रिया के कारण इओसिनोफिलिया- त्वचा पर निशान

इओसिनोफिलिया के अत्यल्प लक्षणों में हैं-वजन में गिरावट, रात में पसीना, लसिका ग्रंथियों का आकार बड़ा होना, त्वचा पर निशान, नसों की क्षति के कारण झुनझुनी और सनसनी होना।

कारण

इओसिनोफिलिया की उत्पत्ति की निश्चित कार्यप्रणाली आमतौर पर अस्पष्ट ही होती है। इओसिनोफिलिया के अधिकतर मामलों के लिए “इडियोपैथिक” शब्द प्रयुक्त होता है, जिसका अर्थ है “अज्ञात उत्पत्ति द्वारा”
इओसिनोफिलिया किसी विशेष क्षेत्र में हुए रोग या इन कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पन्न होने के कारण हो सकता है। 

इओसिनोफिलिया के प्रकार के आधार पर इसकी उत्पत्ति का कारण तय होता है। कारणों में हैं:
  • एलर्जी के रोग, जैसे अस्थमा, एक्जिमा, और एलर्जिक रायनाइटिस।
  • परजीवी कीटाणुओं द्वारा रोग।

Friday, 1 June 2018

गर्म दूध पीने के ये फायदे आपको हैरत में डाल देंगे - Amazing Benefit of Hot Milk

June 01, 2018 2 Comments
दोस्तों हम बचपन से ही सुनते आ रहे है कि दूध पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है दूध पीने से हमें ताकत मिलती है। यह तो सभी जानते है लेकिन यह कोई नहीं जनता है कि इस से से शरीर को ताजगी मिलती है और आराम भी।
Amazing Benefit of Hot Milk
अब समस्या यहां आती है की ठंडा दूध पिए या गर्म कुछ लोग कहते है की गर्म दूध पिए और कुछ लोग बोलते है कि ठंडा दूध फायदा करता है। तो दोस्तों आज इस ब्लॉग के जरिये हम आप को दूध के बारे में बताएंगे और कैसा दूध पीना चाहिए ये भी बताएंगे।

दोस्तों जो भी तत्व हमारे शरीर के लिए आवश्यक होता है वो हर तत्व दूध में पाया जाता है ये विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन, नियासिन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का खजाना होता है।

वैज़निको की एक शोध के अनुसार हर रोज एक गिलास गर्म दूध पीने से स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है आप को यह जान कर आश्चर्य होगा की जो लोग रोज दूध पीते है वो दूध न पीनी वाले की तुलना में शराब, चाय और काफी काम पीते है।

जानते हैं गर्म दूध पीने के ये आश्चर्यजनक फायदे:

1. कैल्शियम की पूर्ति 


हमारे दांतों और हड्ड‍ियों को कैल्शियम की जरूरत होती है. हर रोज गर्म दूध पीने से हमारे दांत और हड्डियां मजबूत बनती हैं.


2. प्रोटीन का खजाना


दूध में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध होता है. इस आधार पर भी इसे हर रोज लिए जाने की सलाह दी जाती है. दिन की शुरुआत एक गिलास गर्म दूध से करने से शरीर दिनभर ऊर्जावान बना रहता है. इसके साथ ही ये मांसपेशियों के विकास के लिए भी बहुत जरूरी है.


3. कब्ज की समस्या में 


अगर आपको कब्ज की समस्या है तो गर्म दूध पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा. ये पाचन के लिए बेहद फायदेमंद होता है. जिन्हें कब्ज की समस्या है वो गर्म दूध को दवा के तौर पर अपना सकते हैं.


4. ऊर्जावान बनाए रखने के लिए


अगर आप काम करने के दौरान बहुत जल्दी थक जाते हैं तो आपको गर्म दूध पीना शुरू कर देना चाहिए. बच्चों को खासतौर पर हर रोज दूध दिया जाना चाहिए.


5. हाइड्रेशन के लिए


क्या आप ये बात जानते हैं कि दूध पीने हमारा शरीर हाइड्रेटेड होता है? वर्कआउट खत्म करने के बाद दूध पीने से शरीर को पोषण मिलता है.


6. गले के लिए फायदेमंद 


दूध का सेवन करने से गला भी अच्छा रहता है. अगर आपके गले में तकलीफ है तो दूध के कप में चुटकीभर कालीमिर्च भी मिला सकते हैं.


7. तनाव दूर करने के लिए


ऑफिस से घर लौटने पर आप दिनभर का तनाव भी अपने साथ लेकर आते हैं. ऐसे में हल्का गर्म दूध पीना आपको इस तनाव से राहत दिलाने में मदद करेगा. दूध पीने के बाद दिनभर का तनाव कम हो जाएगा और आप राहत महसूस करेंगे.


8. अनिंद्रा की समस्या

रात में दूध पीने का ये सबसे बड़ा फायदा है. कई ऐसे अध्ययन सामने आए हैं जिनके अनुसार, रात को सोने से पहले हल्का गर्म दूध पीने से नींद अच्छी और भरपूर आती है. 

लहसुन के फायदे एवं नुकसान सही तरीका और उपाय | Benefits and Disadvantages of Garlic

June 01, 2018 2 Comments
दोस्तों आज हम आप को लहसुन के फायदे एवं नुकसान सही तरीका और उपाय बताएंगे। 
Benefits and Disadvantages of Garlic
लहसुन (Garlic) के बारे में तो आप को पता ही होगा इसका प्रयोग सब्जी, दाल इत्यादि बनाने में किया जाता है। पर क्या आप जानते है की यह कई रोगों के लिए बहुत ही अच्छा अचूक इलाज है। लहसुन का सेवन करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी है की इसका उपयोग कैसे करना चाहिए और कब करना चाहिए कब नहीं करना चाहिए। 

अगर आप को लहसुन खाने का सही तरीका पता है तो आप मोटापा (Fat) काम कर सकते है और त्वचा, दाद, ब्लड प्रसेर शुगर और बालों की समस्या का समाधान केर सकते है।  तो दोस्तों आइये हम आप को बताते है लहसुन कैसे खाएं और इसके फायदे क्या क्या होते है। 

अगर आपको ये बीमारियां हैं तो भूल कर भी लहसुन का इस्तेमाल न करें 

ये बात तो सत्य है कि लहसुन को लहसुन को सब्जी में पका के खाने की बजाय भून के या कच्चा खाने से यह बहुत फायदा करता है लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी है जिसमे इसका प्रयोग भूल कर भी नहीं करना चाहिए। 



अगर आप लौ ब्लड प्रेशर के मरीज है तो आप को कच्चा लहसुन भूल केर भी नहीं खाना चाहिए । 



अगर आप को लीवर से जुड़ी कोई भी बीमारी है या आप का लीवर कमजोर है तो आप को खली पेट लहसुन नहीं खाना चाहिए। 


लहसुन बहुत ही गर्म होता है तो अगर आप गर्भ अवस्ता में है तो आप को लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। 


यदि आप को थायराइड है उस महिला या पुरुष को कच्चा लहसुन बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए। 


यदि आप को लहसुन से एलर्जी है तो आप को कच्चा लहसुन नहीं खाना चाहिए।

कब और कैसे लहसुन खाना चाहिए 

लहसुन के अंदर बहुत सारे औषधीय गुण होते है जो की कई रोगों के लिए बहुत लाभदारी है। अगर आप सुबह सवेरे खली पेट लहसुन की एक कली कहते है तो यह आप के लिए बहुत लाभदारी साबित होता है। आइये जानते है किन बिमारियों में लहसुन बहुत उपयोगी है। 
यह हाई बीपी को काम कर सकता है अगर आप नियमित रूप से रोज सुबह एक से दो लहसुन की कलियाँ खली पेट खाते है तो यह हाई बीपी के लिए बिकुल अचूक इलाज है। 


अगर आप को सर्दी जुकाम है तो आप इस से रहत पाने के लिए आप एक चम्मच सरसों के तेल में एक लसुन की कलि डाल केर अचे से भूने और उसके बाद इस से मालिश करें।  आप को ज़ल्द ही आराम मिलेगा। 


सुबह एक से दो कच्चे लहसुन की कलियां खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है अगर आप को इसका स्वाद नहीं पसंद है तो आप इसे कूट केर पानी के साथ भी निगल सकते है। 


हड्डियों के लिए भी लहसुन बहुत गुणकारी है। अगर आप गठिया के रोग से पीड़ित है तो आप इसे खाने के साथ इस्तेमाल कर सकते है 


शुगर की बीमारी में भी लहसुन बहुत उपयोगी है अगर आप को शुगर की बीमारी है तो आप दो से तीन लहसुन की कलियों का रस बेल के पत्ते के रस से साथ मिला केर पीजिये आप को ज़ल्द ही आराम मिलेगा। 


दाद में लहसुन एक अचूक औषधि का काम करती है लहसुन को जला केर इसकी राख को शहद के साथ मिला केर दाद वाली जगह पे लगाए आप को ज़ल्द ही आराम मिलेगा। 


लहसुन से अंदर रोगों से लड़ने की छमता होती है इस से कैंसर जैसे रोगों का भी इलाज होता है भुना हुआ लहसुन खाने से यह शरीर के अंदर से कैंसर वाले कोशिकाओं को ख़तम कर देता है। 


अगर आप मोटापे से परेशान है तो लहसुन के सेवन से पेट में जमी चर्बी घटने लगती है और अगर आप ऐसे शहद के साथ कहते है तो यह और भी ज़ल्दी असर दिखता है। 


अगर आप को बालों की परेशानी है जैसे कि बाल झड़ना। इस समस्या के लिए लहसुन को पीस कर दही में मिला केर खाएं आप को इस समस्या से छुकारा मिल जायेगा। 


अगर आप को कब्ज या बवासीर जैसी बीमारियां है तो आप भुना हुआ लहसुन खाये आप को बहुत ज़ल्द ही आराम मिलेगा। 


अगर आप की त्वचा पे दाग धब्बे है तो आप लहसुन की दो से तीन कलियाँ गुनगुने पानी में नीबू के साथ मिला कर पीजिये आप को ज़ल्द ही आराम मिलेगा। 


पेट में गैस और पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ साथ गले की खांसी में भी लहसुन बहुत उपयोगी है 


अगर आप को स्वप्नदोष की समस्या है तो आप रात को सोते समय एक लहसुन की कली को चबा केर खा लीजिये इस से आप की शारीरिक सकती भी बढ़ेगी। 

खाली पेट लहसुन खाने के नुकसान

ध्यान रहे अगर आप लहसुन का सेवन अधिक मात्रा में करते है तो आप कुछ बीमारियां हो सकती है जैसे की पेट फूलना, गैस और सांस में बदबू आना। 


महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्यादा लहसुन नहीं खाना चाहिए इस से खून का बहाव तेज़ हो जाता है। 


ज्यादा मात्रा में लहसुन खाने से खून पतला होता है इस लिए ये जानना बहुत जरुरी है की लहसुन को कैसे और कितनी मात्रा में खाये। 


लहसुन को कभी भी त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए इससे त्वचा जल सकती है। 


अगर आप के शरीर में खून की कमी है तो भी आप को लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। 


ध्यान रहे खाली पेट लहसुन खाना कितना गुणकारी है उतना ही हानिकाराम भी इस लिए खाली पेट ज्यादा लहसुन न खाये।